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PMCH से फरार दो लाख का इनामी शार्प शूटर प्रिंस वैशाली में पुलिस एनकाउंटर में ढेर।

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वैशाली।दो लाख रुपये का इनामी, 28 संगीन मामलों का आरोपी और पुलिस के लिए सिरदर्द बना शार्प शूटर प्रिंस उर्फ अभिषेक आखिरकार कानून के शिकंजे से बच नहीं सका। वैशाली जिले में हुई मुठभेड़ ने न सिर्फ एक कुख्यात अपराधी का अंत किया, बल्कि बिहार में सक्रिय संगठित अपराध के उस नेटवर्क पर भी रोशनी डाली, जो वर्षों से पुलिस को चुनौती देता रहा है।
PMCH से फरारी पर उठे सवाल

प्रिंस की कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू उसकी पीएमसीएच से फरारी है। बेऊर जेल में बंद रहते हुए बीमारी का हवाला देकर उसे इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। यहीं से वह पुलिस निगरानी को चकमा देकर फरार हो गया। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और एस्कॉर्ट सिस्टम पर गंभीर सवाल उठे थे। सूत्रों की मानें तो फरारी के बाद उसने लगातार ठिकाने बदले और अपने पुराने नेटवर्क के जरिए खुद को छिपाए रखा।

शार्प शूटर से ‘मास्टरमाइंड’ तक का सफर

गोरौल थाना क्षेत्र के हसना गांव का रहने वाला प्रिंस, कुख्यात अपराधी सुबोध सिंह का भरोसेमंद शार्प शूटर माना जाता था। समय के साथ उसने खुद की पहचान एक संगठित अपराध संचालक के रूप में बना ली। 300 किलो सोना लूट कांड में उसका नाम सामने आने के बाद यह साफ हो गया था कि वह अब केवल हथियार चलाने वाला नहीं, बल्कि बड़ी वारदातों की साजिश रचने वाला अपराधी बन चुका था।

28 मुकदमे और पुलिस जवान की हत्या

प्रिंस पर हाजीपुर कोर्ट में तैनात एक पुलिस जवान की हत्या समेत कुल 28 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। यही वजह थी कि सरकार ने उसके सिर पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के लिए उसकी गिरफ्तारी सिर्फ एक अपराधी को पकड़ना नहीं, बल्कि कानून के मनोबल की लड़ाई बन चुकी थी।

गुप्त सूचना से ऑपरेशन तक

पुलिस को जब सूचना मिली कि प्रिंस वैशाली जिले के एक मकान में छिपा हुआ है, तो इसे हल्के में नहीं लिया गया। विशेष टीम बनाई गई, इलाके की घेराबंदी की गई और हर संभावित रास्ते पर नजर रखी गई। जैसे ही पुलिस टीम मकान के पास पहुंची, अंदर से फायरिंग शुरू हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में प्रिंस गंभीर रूप से घायल हुआ।

अस्पताल में मौत, साथी गिरफ्तार

मुठभेड़ के बाद प्रिंस को सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं उसके साथ मौजूद एक अन्य युवक को पुलिस ने घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से हथियार बरामद हुए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रिंस अकेला नहीं, बल्कि संगठित गिरोह के सहारे छिपा हुआ था।

हथियार बरामद, नेटवर्क पर शिकंजा

वैशाली के पुलिस कप्तान विक्रम सिहाग के अनुसार, एनकाउंटर में इस्तेमाल की गई पिस्टल जब्त कर ली गई है। गिरफ्तार साथी से पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित ठिकानों की जानकारी मिलने की उम्मीद है। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।

अपराध जगत में संदेश

प्रिंस का अंत केवल एक एनकाउंटर नहीं माना जा रहा, बल्कि यह उन अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है, जो सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर खुद को कानून से ऊपर समझने लगे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आगे भी संगठित अपराध के खिलाफ अभियान तेज रहेगा।

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